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Sidhant Sehgal

Mar’s Combust

ज्योतिष में मंगल ग्रह का अस्त होना – आपके जीवन पर इसका असर

ज्योतिष में मंगल ग्रह का अस्त होना एक गहरी और महत्वपूर्ण घटना है। ज्योतिष हमेशा से हमें यह समझाने की कोशिश करता है कि आकाश में ग्रहों की स्थिति हमारे स्वभाव और जीवन की दिशा को किस तरह प्रभावित करती है। इन्हीं घटनाओं में से एक है मंगल ग्रह का दहन या अस्त होना।

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत करीब आ जाता है, तो उसे ज्योतिष में अस्त या दहन कहा जाता है। इस स्थिति में ग्रह की अपनी शक्ति कमजोर हो जाती है। मंगल जब सूर्य के निकट होता है तो उसकी तेजस्वी और आक्रामक ऊर्जा कुछ हद तक दब जाती है और जातक को उसके पूरे फल नहीं मिल पाते।

मंगल को ज्योतिष में साहस, पराक्रम, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता का ग्रह माना जाता है। यह हमारी महत्वाकांक्षा, निर्णय लेने की क्षमता, गुस्सा और प्रतिस्पर्धात्मक स्वभाव को नियंत्रित करता है। मंगल मजबूत हो तो व्यक्ति में एक अलग ही जोश और निर्भीकता दिखाई देती है। परंतु जब यही मंगल अस्त हो जाता है, तब इसका प्रभाव व्यक्ति पर अलग ढंग से पड़ता है।

जिन लोगों की जन्मकुंडली में मंगल अस्त होता है, उनमें आमतौर पर जल्दी उत्तेजित हो जाने की प्रवृत्ति देखी जाती है। वे अधीर हो सकते हैं, छोटी-छोटी बातों पर तर्क-वितर्क में पड़ सकते हैं और अपनी ऊर्जा को एक दिशा में केंद्रित करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। कई बार यह स्थिति रिश्तों और पेशेवर जीवन में भी संघर्ष का कारण बनती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मंगल अस्त होने वाले लोग केवल नकारात्मकता ही अनुभव करते हैं। यदि वे अपनी ऊर्जा को नियंत्रित करना सीख लें और अनुशासन में ढाल लें, तो वही मंगल उन्हें असाधारण उपलब्धियाँ भी दिला सकता है।

मंगल अस्त के प्रभाव को कम करने के लिए प्राचीन ग्रंथों में कई उपाय बताए गए हैं। जैसे मंगल मंत्र का नियमित जाप करना, हनुमान जी की आराधना करना, या मूंगा रत्न धारण करना (परंतु रत्न पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य करना चाहिए)। इसके अलावा व्यावहारिक जीवन में भी कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं। व्यायाम करना, अनुशासित रहना, ध्यान और धैर्य का अभ्यास करना मंगल की उग्र ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करते हैं।

मंगल अस्त की स्थिति का प्रभाव कुंडली के भावों के अनुसार भी बदलता है। प्रथम भाव में मंगल अस्त हो तो आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है, जबकि सप्तम भाव में अस्त मंगल वैवाहिक जीवन में चुनौतियाँ ला सकता है। इसी प्रकार हर भाव और हर राशि में मंगल का अस्त होना अलग-अलग प्रभाव देता है।

अंत में, यह समझना जरूरी है कि ग्रह हमें केवल एक दिशा दिखाते हैं, परंतु जीवन की राह हमें अपने कर्मों और समझदारी से ही तय करनी होती है। मंगल अस्त हो या प्रबल, यदि हम अपनी ऊर्जा को सही दिशा दें, तो जीवन में हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।

Sidhant sehgal-Vedic & kp astrologer

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